(उम्र की किश्ती का समंदर-जगत की डरती माता-दयालु शिव जी भोलेनाथ)
दिल का मालिक चन्द्रमा है जो सूरज की रौशनी लेता और दुनिया में उसका नायब-उल-सल्तनत है | सूरज चाहे कितना ही गरम होकर हुक्म देवे, मगर चन्द्रमा उसे ठंडे दिल और शांति से बजा लाता और हमेशा सूरज के पांव में रहना चाहता है | चन्द्रमा का घर हथेली पर बेशक सूरज से दूर है मगर दिल का शांति सरोवर या दिल रेखा सूरज के पांव में बहता रहता है | स्त्री (शुक्र) माई (चन्द्र माई) साले बहनोई (मंगल नेक) और अपने भाई (मंगल बद), गुरु और पिता (बृहस्पत सबके सब इस दिल के दरिया या चन्द्र रेखा की यात्रा को आते हैं जो सूरज की चमक से दबी हुई आँखों (शनीच्चर) और दिमाग (बुध) को शांति और ठंडक (चन्द्र का असर) देता है या दूसरे लफ्ज़ों में यूँ कहो कि इस दरिया दिल रेखा के एक किनारे दुनिया के सब रिश्तेदार और दूसरी तरफ़ इन्सान का अपना ज़िस्म व रूह (सूरज) और चश्म व सिर (शनीच्चर व बुध) बैठे हैं और दिल रेखा उन दोनों के दरमियान चलती हुई दोनों तरफ़ में अपनी शांति से उम्र बढ़ा रही है या ज़िस्म इंसानी को बृहस्पत की हवा के साँस से हरकत में रखने वाली चीज यही दिल रेखा है, इसलिए ही बाज़ों ने दिल रेखा को उम्र रेखा भी माना है, और उसके मालिक चन्द्र की चाल से उम्र के सैलून की हदबन्दियां मुकर्रर की हैं
- लाल किताब 1952
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