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Tuesday, 6 January 2015

lal-kitab-page-no-813

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सूरज शनीच्चर रवि शनि दो इकठ्ठे बैठे, झगड़ा कोई नहीं करता हो
वज़ह किसी हों जब कभी लड़ते, बुध ज़हर आ भरता हो
नतीज़ा वही जो रवि हो टेवे, शनि शक्की-ही होता हो
झगड़ा दोनों का लंबा बढ़ते(१), नीच राहु बद मंगल हो
आग़ वकुवे कीमत कौड़ी, चीजें शनि सब मंदी हो
शनि जलावे ताक़त बदनी, रवि सेहत ज़िस्मानी को
काम उत्तम ज़र चांदी होगा, हालत तालीमी फलता हो
बुध साथी से दोनों उम्दा, असर उत्तम सब करता हो

   दुश्मन ग्रहों (शुक्र पापी) के साथ बैठा हुआ सूरज (ख्वाह किसी भी घर में हो) उस साथ बैठे हुए दुश्मन ग्रह(२) की उस ख़ाना के मुतल्लिका अश्या पर बुरा असर देगा | ऐसी हालत में 22 से 45 साला उम्र के दरमियान दुश्मन ग्रह अपनी अपनी मियाद पर बुरा असर देंगे | दुश्मन ग्रह को बज़रिया बुध की पालना नेक कर लेना मुबारक होगा | अगर सूरज के दोस्त (चन्द्र मंगल बृहस्पत) भी साथ ही हों तो दोस्तों की मुतल्लिका अश्या पर मंदा असर होगा, दुश्मन बचा रहेगा |


१) सूरज शनिच्चर मुश्तरका में जब जहाँ और कहीं भी दो में से किसी का फल ख़राब हो तो टेवे में 22 या 36 साला उम्र तक राहु भी मंदा और मंगल बद का असर देगा | इश्क व मोहब्बत या मिटटी की पूजना बहाना होगी | बददियानती से शुक्र बर्बाद होगा |

२) अश्या मुतल्लिका सूरज शनिच्चर पेज नंबर 815 पर दर्ज़ है बंदर और बये की दास्तान    बारिश ज़ोर की हो रही थी और बया अपने घोंसले में बैठ रहा था | बंदर तकलीफ़ में उसी दरख्त पर चिड़ चिड़ चें चें कर रहा था | बये ने वक्त से पहले घोंसला बनाने की बंदर को नसीहत की तो उस आली दिमाग ने बये का घोंसला ही बर्बाद कर दिया | हू-ब-हू ऐसे प्राणी की क़िस्मत जब वह अपनी मदद के लिए किसी तरफ़ हाथ बढ़ाए तो सांप अपने ज़हरीले दांत से सब कुछ बर्बाद कर ही देगा | ख़ाली बुध का बेमानी असर होगा जो बुध की ताकत आम इल्म तालीम मुराद होगी और जिस में शनि का मंदा फ़ल भी शामिल होगा | (ख्यालात की आज़ादी-मौक़ा के मुताबिक़ फ़ौरन लट्टू की तरह बदल जाने वाला होगा) असर का वक्त बुढ़ापे से मुतल्लिका होगा | सूरज-चन्द्र और बृहस्पत उत्तम फल देंगे | दोनों ग्रह वासे धन दौलत 46 साला उम्र तक मुश्तरका होंगे और शनिच्चर उस मिलावट में 2/3 हिस्सा होगा | दोनों ग्रह वासे वालिद की उम्र 40 साला उम्र तक मुश्तरका होंगे और शनिच्चर उस मिलावट में 1/2 हिस्सा होगा | दोनों ग्रह वास्ते दुनियावी सुख 34 साला उम्र तक मुश्तरका होंगे और शनिच्चर उस मिलावट में 1/3 हिस्सा होगा |

Friday, 26 December 2014

lal-kitab-page-no-911

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बृहस्पत-सूरज-चन्द्र उत्तम फल-इक़बालमंद होगा-ताजिर-अहलकलम जिससे दूसरों को भी फ़ायदे पहुंचें और बजरिया ठोस हाज़िर माल बाकी साथियों को भी तारता जाये बृहस्पत-सूरज-शुक्र शुक्र की मुतल्लिका अश्या कारोबार या रिश्तेदार मुतल्लिका शुक्र का फल नेक होगा और शादी के दिन से क़िस्मत जागेगी, औरत भी रंग सुभाव व क़िस्मत के ताल्लुक में हर तरह उत्तम साफ़ नेक और उम्दा होगी | बृहस्पत-सूरज-मंगल बृहस्पत (शेर बब्बर), सूरज (नर शेर), मंगल (चीते से मिलता जुलता शेर बहादुर) तीनों ही नर ग्रहों के शेरों का टोला एक ही जगह पर इकठ्ठा आमतौर पर दो शेर तो इकठ्ठे एक जगह नहीं रह सकते, मगर अब एक ऐसा टेवा होगा, जिसमें तीनों ही यह ग्रह इकठ्ठे बैठे हों तो वह शख्श ऐसा होगा जिसके साये के नीचे तीन शेर इकठ्ठे बैठकर गुज़ारा कर सकें, अगर कोई के शेर की सवारी करने की ताकत का मालिक हो तो वह तीनो शेरों का सवार हो या एक ही वक्त तीन शेरों को इकठ्ठा करके या इकठ्ठा जोत कर सवारी करता हो बड़ी उत्तम और नेक क़िस्मत का मालिक होगा | ख़ुद उसे (सूरज) उसके बाप दादा (बृहस्पत) या बड़े भाई, ताया, मामू (मंगल) में हिम्मत होगी कि वह तीन तीन शेरों या शेर बहादुर मर्दां को एक ही हाथ से मार सके या नीचा दिखा सके और दुनियावी ताल्लुक में उनको कम अज कम खून की सज़ा (फांसी) देने का अख्तियार होगा उसका तांबा भी सोना बन जावे, तीनों ही ग्रहों का हर तरफ़ और हर तरह का उत्तम और उम्दा फल होगा और तीनों ही ग्रहों (बृहस्पत-सूरज-मंगल) के लिए हर एक अकेले अकेले का बैठे हुए घर के मुताबिक दिया हुआ फल मुबारक होगा |